शादी हर जोड़े के लिए एक अनूठा पल है | हर कोई उम्मीद करता है कि आने वाला जीवन साथी जीवन को सार्थक बना देगा | जीवन का सफर शादी के बाद एक दुसरे के सहारे आसानी से कट जाता है परन्तु कुछ लोगों को उम्मीद से अधिक सफलता मिलती है तो किसी को उस उम्मीद के साथ टूट जाना पड़ता है | शादी के बाद कुछ लोगों की जिन्दगी बन जाती है तो कुछ लोगों की जिन्दगी बिगड़ जाती है | आखिर क्यों होता है ये सब ? इसे जानने के लिए यदि आप अपनी कुंडली का अध्ययन करें तो समझने में अधिक मुश्किल नहीं होगी | जैसा की मैंने अपने हर लेख में बताया है कि ज्योतिष का सामान्य ज्ञान आवश्यक है | इससे जीवन की कठिनाइयों के बारे में शत प्रतिशत अनुमान लगाया जा सकता है और कुछ समस्याओं का तो समाधान भी संभव है |

शादी और नौकरी

पुरुष तो शादी के बाद कुछ न कुछ कारोबार करते ही हैं परन्तु स्त्रियों के मन में हमेशा ये सवाल रहता है कि क्या शादी के बाद मैं नौकरी कर पाऊँगी? क्या ससुराल वाले नौकरी करने देंगे ? क्या मिलेगी ? या फिर में कुछ तरक्की होगी या नहीं ? इन सब और कुछ इसी तरह के सवालों का जवाब यह है कि यदि आपकी कुंडली में लाभ स्थान में कोई ग्रह है तो आपकी एक निश्चित तनख्वाह या इनकम रहेगी | लग्न से दसवां घर यदि नौकरी का है तो लग्न से सातवाँ घर आपकी शादी का होता है यह सभी जानते हैं | इसी तरह सातवें से दसवां घर यानी चौथा स्थान शादी के बाद की नौकरी का होता है | इसे हम भावात भावम का सिद्धांत कहते हैं |

शादी के बाद तरक्की

भावात भावम के सिद्धांत के अनुसार यदि कुंडली के चौथे घर में कोई ग्रह है और उसके अंश १० से २० के बीच हैं और वह ग्रह नीच राशि या शत्रु की राशी में नहीं है तो शादी के बाद तरक्की निश्चित है | अब यह तरक्की कितनी होगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रह में बल कितना है |

द्रेष्काण चक्र जिसे अधिकतर ज्योतिषी नजरअंदाज कर देते हैं कुंडली का दसवां अंश होता है जो कि गहराई से कुंडली को देखने के लिए प्रयोग में लाया जाता है | द्रेष्काण चक्र से हम नौकरी कारोबार या कर्म की स्थिति का गहराई से अध्ययन कर करते हैं | इस चक्र में देखिये कि सबसे अधिक बलवान कौन सा ग्रह है | जो भी ग्रह अपनी उच्च या स्वराशी में होगा उसी के अनुसार आजीविका होगी | उस ग्रह पर पड़ने वाला शुभ और अशुभ प्रभाव नौकरी या कारोबार में उतार चढ़ाव का कारण बनता है |

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